ॐ श्री परमात्मने नमः
कुछ ज्ञान कि बातें जो आपको जाननी चाहिए -
दिल भावनायें वक्त करना जानता है और हर शब्द का भी एक अर्थ होता है। दिल उस शब्द का अर्थ समझ कर उसी तरह कि भावना व्यक्त करना चाहता है, जिसको शरीर या हमारा मन समझ जाता है और उसी तरह करता भी है। हर वेद ध्वनि चाहे ॐकार हो या कोई गाली ही क्यों न हो, उसका दिल पर उस तरह से ही प्रभाव होता है और दिल उस तरह कि भावना व्यक्त करता है मन या शरीर के माध्यम से। अशब्द (गाली) सुनने पर गुस्सा भी इसी कारण से आता है, दिल को ठेस पहुंचती है और वो वैसे ही भावना व्यक्त कर देता है।
- इसका अर्थ ये हुआ कि सच्चे दिल से दिया श्राप, वचन या वरदान सत्य जरुर होता है।
- जिस तरह कि दिल कि भावना से ये सब दिया जाता है वैसे ही ये फलित भी होती है और उसकी आगे कि नियती भी बनती है।
- इसलिए जब हम अच्छी बातें (चाहे वो भजन हो, वेद ध्वनि हो या ॐकार हो) सुनते हैं तो हमारा दिल और दिमाग दोनों कि मलीनता दुर हो जाती है जिसके कारण भगवान में मन भी लगता है निश्च्छल भाव से।
- दिल को सुख या दु:ख होने पर वह भावनायें व्यक्त करता है जिसे मन मस्तिष्क के माध्यम से उस भाव को समझता है, जो उसे करना होता है।
- किसी से किया गया प्रेम कभी नहीं मरता बल्कि उसको जगाने की जरूरत पड़ती है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रेम जागने पर सारी गलत चीजें सही हो जाती हैं।
- अब सवाल यह उठता है कि प्रेम अगर मरता नहीं है तो आखिर रहता कहां है तो इसका सीधा सा उत्तर है कि प्रेम हमारे अच्छे पलों में जीवित रहती है, जब हम उनको याद करते हैं तब वह प्रेम फिर से हमारे अंदर जागृत हो उठती है यही शाश्वत है और यह नियम भी है।
- सच्चा प्रेम वो होता है जो आपको आपके प्रियतम (चाहे जो भी हो प्रेमिका, कोई अन्य या फिर ईश्वर।) से आपको मिला दें।
- हम कैसे जानेंगे कि हमारा प्रेम सच्चा है, इसका उत्तर है - जब हम निशवार्थ भाव से किसी से प्रेम करने लगें तो उसको हम सच्चा प्रेम कह सकते हैं। जो प्रेम आपको मोह-माया से बांधता हो, वो प्रेम असल में होता ही नहीं है। इसलिए जो निश्छल भाव से ईश्वर को प्रेम करता है उसके लिये सभी रास्ते खुल जाते हैं और वो ईश्वर को पा ही लेता है।
- अगर कोई सच्चे दिल से सही राह पर चलता है तो उसको डर इसलिए नहीं लगता है क्योंकि उसके दिल को यह यकीन होता है कि वो सही है। उसे यह क्यों लगता है कि वह सही है और सही राह पर चल रहा है, क्योंकि उसका दिल सच्ची गवाही देता है कि जो वो कर रहा है वह सही है।
- सच्ची निष्ठा और लगन से किया गया कार्य विफल नहीं होता चाहे वह जिस क्षेत्र में हो। जिसका कारण उसकी सच्ची निष्ठा है कार्य के प्रति, या फिर लक्ष्य के प्रति।
