मनुष्य जीवन में ईश्वर कि सत्ता -
सब कुछ ईश्वर कि शक्ति द्वारा संचालित है। ईश्वर का ही दिया सब कुछ है, सभी अच्छे कार्यों में ईश्वर कि ही इच्छा कार्य करती है। सवाल उठता है इसमें हमारा किरदार क्या ?
उतर यह है कि हम सिर्फ सही-गलत चिजों का चुनाव कर सकते हैं। यानी कि जैसा हमारा सही-गलत रास्तों का चुनाव होगा, ईश्वर वैसे ही रास्ते हमारे लिये खोलते चलें जायेंगे। इसलिए हम मनुष्यों को सभी चिजों को समझने का विवेक मिला है और हमें सही चिजों का चुनाव करना आवश्यक है। सभी कोटी - कोटी जीवों में मनुष्य को ही सोचने समझने कि शक्ति मिली है इसलिए मनुष्य को इसका लाभ जरूर उठाना चाहिए।
इसका मतलब साफ है ईश्वर सिर्फ रास्ता दिखातें हैं सही ग़लत का चुनाव कर के, चलना हमें स्वयं पड़ता है। अगर हम ग़लत रास्ते का चुनाव करें तो हमें दुख उठाना पड़ता है और सही रास्ते पर चलने पर हमें सुख कि प्राप्ति होती है।
अब बात उठती है कि व्यक्ति सही रास्तों का चुनाव करें कैसे, तो इसका उत्तर बहुत सरल है ईश्वर का नाम लेकर रास्ते का चुनाव करें सब कुछ अच्छा हो जायेगा और आप पायेंगे कि आप सही रास्ते पर ही चल रहे हैं।
ईश्वर हमारे सच्चे मित्र हैं वो नहीं चाहते कि हम सही रास्ते से भटक जायें पर हम ईश्वर को भुल कर स्वयं को कर्ता मान बेठते हैं और खुद ही सही ग़लत का चुनाव कर के सुख-दुख पाते हैं।
इसलिए मेरा मानना है कोई भी कार्य करते समय ईश्वर को नहीं भुलना चाहिए क्योंकि ईश्वर से ज्यादा कोई हमारे भले के बारे में नहीं सोच सकता।
हम सब ईश्वर के अंश हैं इसलिए ईश्वर का भी हमारे से एक अटुट रिश्ता है। ईश्वर को हम जिस भावना से पुजेंगे, उसी भावना से ईश्वर हमें फल देंगे।
Last Word यही कहुंगा कि जहां आपको लगे कि मैं सही हूं वहां खुद से निर्णय लिजिए और जहां समझ न आये वहां ईश्वर कि सहायता जरुर लिजिए। आपका सब कुछ मंगलमय और अच्छा हो जायेगा।

