ॐ श्री परमात्मने नमः
[01/02, 1:25 pm] Vinay Singh:
सब कुछ खुद ही हो रहा है हम बस उसके निमीत मात्र बनते जा रहे हैं, और जब यह सब ईश्वर कि आज्ञा से हो रहा है तो इसमें हमारा किरदार क्या है। जो हो रहा है होने दें। बस क्या किरदार निभाया हमने, वो सिर्फ देखते जायें।
जो हो रहा है वो होने दो, इसमें हमारा कोई बस नहीं है। अब सवाल उठता है कि हम करें तो क्या करें, इसका उत्तर साफ है कि जो दिल चाहता है वो करो। अच्छा बुरा मत सोचो, ये सोचना हमारा काम नहीं है हमें व्यर्थ कि चिंता करने की क्या जरूरत। ये ईश्वर पर छोड़ दो क्या अच्छा है और क्या बुरा, क्योंकि हम सिर्फ जीव है और हमारा काम है सिर्फ कर्म करना।
सुख-दुख तभी होता है जब हमारे पास ये विवेक आ जाता है कि ये कर्म अच्छा है और ये कर्म बुरा। इसलिए ये अच्छे-बुरे कर्मों का निर्णय ईश्वर पर छोड़ दो और खुल कर अपना जीवन जीयो।
हम क्या कर सकते हैं जो हो रहा है अच्छा हो रहा है, होने दो। ऐसा इसलिए क्योंकि रोक तो हम कुछ सकते नहीं, ऐसा इसलिए अगर हम सच में रोक सकते, तो क्या किसी कि मृत्यु या दुःख होने देते। ये सिधा सा उदाहरण है जिसे हमें समझना है।
दिल का सिधा Connection ईश्वर से होता है।
ऐसा इसलिए क्योंकि सच्चे दिल के व्यक्ति ही ईश्वर को पा सकते हैं या उसको पाने का रास्ता दिखा सकतें हैं।
हृदय जिसे हम दिल भी कहते हैं उसका कार्य भावना व्यक्त करना होता है। जैसा वो शरीर के इन्दियों के माध्यम से देखता, सुनता और बोलता है इत्यादि। वैसा ही वह भावना व्यक्त करता है।
हम अपने सभी दुःखों को कैसे खत्म कर सकते हैं, इसका मेरे पास एक ही उत्तर है जिस चिज़ का आपको भय है वो होने दो, बाद में पता चलेगा वह भय भी खत्म हो गया और दुःख भी नहीं हुआ। इसका सिधा सा अर्थ है कि उस चिज़ में आशक्ति मत रखो, आशक्ति ही सभी दुखों का कारण है।
