कबीर दास जी के दोहे | Kabir Das Ji Ke Dohe in Hindi

Vinay Singh
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कबीर दास जी 15वीं सदी के भारतीय रहस्यवादी कवि और संत थे। वे हिन्दी साहित्य के भक्तिकालीन युग में परमेश्वर की भक्ति के लिए एक महान प्रवर्तक के रूप में उभरे। इनकी रचनाओं ने हिन्दी प्रदेश के भक्ति आंदोलन को गहरे स्तर तक प्रभावित किया। उनका लेखन सिक्खों के आदि ग्रंथ में भी देखने को मिलता है।

कबीर दास जी के प्रसिद्ध दोहे -

कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 1 -

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 2 -

चाह मिटी, चिंता मिटी मनवा बेपरवाह ।
जिसको कुछ नहीं चाहिए वह शहनशाह॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 3 -

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 4 -

माटी कहे कुम्हार से, तु क्या रौंदे मोय ।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूगी तोय ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 5 -

साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय,
सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय।


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 6 -

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर ।
कर का मन का डार दे, मन का मनका फेर ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 7 -

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 8 -

तिनका कबहुँ ना निंदये, जो पाँव तले होय ।
कबहुँ उड़ आँखो पड़े, पीर घानेरी होय ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 9 -

गुरु गोविंद दोनों खड़े, काके लागूं पाँय ।
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो मिलाय ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 10 -

सुख मे सुमिरन ना किया, दु:ख में करते याद ।
कह कबीर ता दास की, कौन सुने फरियाद ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 11 -

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान,
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 12 -

कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और ।
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 13 -

माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर ।
आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 14 -

दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 15 -

सुख मे सुमिरन ना किया, दु:ख में किया याद ।
कह कबीर ता दास की, कौन सुने फरियाद ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 16 -

लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट ।
पाछे फिरे पछताओगे, प्राण जाहिं जब छूट ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 17 -

जाति न पूछो साधु की, पूछि लीजिए ज्ञान ।
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 18 -

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय ।
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 19 -

बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नही फल लागे अति दूर ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 20 -

पाँच पहर धन्धे गया, तीन पहर गया सोय ।
एक पहर हरि नाम बिन, मुक्ति कैसे होय ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 21 -

कबीरा सोया क्या करे, उठि न भजे भगवान ।
जम जब घर ले जायेंगे, पड़ी रहेगी म्यान ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 22 -

जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होय ।
यह आपा तो ड़ाल दे, दया करे सब कोय ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 23 -

जहाँ काम तहाँ नाम नहिं, जहाँ नाम नहिं वहाँ काम ।
दोनों कबहूँ नहिं मिले, रवि रजनी इक धाम ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 24 -

कामी, क्रोधी, लालची, इनसे भक्ति न होय ।
भक्ति करे कोइ सूरमा, जाति वरन कुल खोय ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 25 -

साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहै थोथा देई उडाय॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 26 -

जो तोको काँटा बुवै ताहि बोव तू फूल।
तोहि फूल को फूल है वाको है तिरसुल॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 27 -

उठा बगुला प्रेम का तिनका चढ़ा अकास।
तिनका तिनके से मिला तिन का तिन के पास॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 28 -

सात समंदर की मसि करौं लेखनि सब बनराइ।
धरती सब कागद करौं हरि गुण लिखा न जाइ॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 29 -

उठा बगुला प्रेम का तिनका चढ़ा अकास।

तिनका तिनके से मिला तिन का तिन के पास॥


कबीर के दोहे (Kabeerdas Ke Dohe ) 30 -

साधू गाँठ न बाँधई उदर समाता लेय।
आगे पाछे हरी खड़े जब माँगे तब देय॥

उम्मीद करता हूं दोस्तों कि आपको ये Post अच्छी लगी होगी, कृप्या इस Post को ज्यादा से ज्यादा Share करें... धन्यवाद !!

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